Mojtaba Khamenei says Iran will protect its 'nuclear, missile capabilities'; U.S. suffered ‘disgraceful defeat’

मोज़तबा खमनेई का दावा: ईरान अपनी ‘नाभिकीय और मिसाइल क्षमताओं’ की रक्षा करेगा; अमेरिका को ‘बदनाम हार’ का सामना

टैहरान। ईरान के सुप्रीम लीडर मोज़तबा खमनेई ने स्पष्ट किया है कि उनका देश अपनी नाभिकीय और मिसाइल क्षमताओं की रक्षा पूरी मजबूती से करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका को परमाणु और मिसाइल तकनीक के मामले में ईरान के सामने हार सहनी पड़ी है, जिसे उन्होंने “बदनाम हार” बताया।

अपने बयान में खमनेई ने अमेरिकी नीतियों और क्षेत्रीय हस्तक्षेपों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकियों का फारस की खाड़ी में केवल वही स्थान है जो “उसकी जलराशि के तल में” है। यह टिप्पणी तब आई है जब फारस की खाड़ी एवं स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज पर ईरान का कड़ा नियंत्रण है, जिसे वह क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए बनाए हुए है।

सुप्रीम लीडर ने यह भी कहा कि अमेरिका ने क्षेत्रीय मामलों में हस्तक्षेप कर खुद को नीचा दिखाया है और अब उसे अपनी नीतियों का परिणाम भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने माना कि ईरान की नाभिकीय और मिसाइल क्षमता देश की सुरक्षा का अहम हिस्सा है और उसे किसी कीमत पर कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा।

इन बयानों के बीच, तनाव के इस दौर में फारस की खाड़ी की अहमियत और बढ़ गई है, जहां ऊर्जा संसाधनों का आवागमन होता है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, जो तेल और गैस के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है, पर ईरान का प्रभाव अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि खमनेई के कड़े शब्द अमेरिका को भेजा गया एक सख्त संदेश है, जिसमें ईरान न केवल अपनी सुरक्षा उपकरणों की रक्षा करना चाहता है, बल्कि क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव को भी सीमित करने का प्रयास कर रहा है। इस विवाद के चलते, फारस की खाड़ी और आसपास के देश सतर्क और सजग बने हुए हैं ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है, खासकर परमाणु समझौते को लेकर। दोनों देशों के बीच वार्ता का सिलसिला कई बार टूटा और तनावपूर्ण रहा है। मोज़तबा खमनेई के इस संदेश ने इस स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रश्न चिन्ह लग गया है।

ईरान ने बार-बार अपना कहना दोहराया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांति और ख़ुद रक्षा के उद्देश्य से है, जबकि पश्चिमी देश इसे खतरा मानते हैं। खमनेई के इस बयान से उनके रुख में कोई बदलाव नहीं दिखता और यह संकेत देता है कि ईरान अपनी ताकत को बढ़ाने और सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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