भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग को नई मजबूती
नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की पहल से आयोजित IN–SLN DIVEX 2026 नामक संयुक्त समुद्री अभ्यास ने भारत और श्रीलंका के बीच सामरिक और तकनीकी सहयोग को एक नया आयाम दिया है। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य जटिल जलरूपी संचालन की दक्षता बढ़ाना और दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता को सुदृढ़ करना था।
भारतीय नौसेना के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस अभ्यास में गहरे समुद्र में गोता लगाने की तकनीकों को आधुनिक स्तर पर परखा गया, एवं इसमें मिक्स्ड गैस डाइविंग जैसे उन्नत प्रशिक्षण शामिल थे। इन सदृश गतिविधियों से समुद्री अभियानों की कार्यकुशलता और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में वृद्धि होती है।
अभ्यास के दौरान, दोनों देशों के गोताखोरों ने विभिन्न तकनीकी चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया। इसमें गहरी जलमंडलीय स्थिति में सुरक्षित और प्रभावी संचालन की क्षमता को प्राथमिकता दी गई, जो समुद्री सुरक्षा और बचाव अभियानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
नौसेना विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अभ्यास द्विपक्षीय रिश्तों को ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करते हैं। साथ ही, यह परस्पर समझ और भरोसे को भी बढ़ावा देते हैं, जो समुद्री क्षेत्र में सहयोग और शांति के लिए आवश्यक है।
भारत-श्रीलंका के बीच ये समुद्री कूटनीति के महत्वपूर्ण उपकरण हैं, जो दोनों देशों को समुद्री आतंकवाद, मच्छली अवैध शिकार और समुद्री अपहरण जैसी खतरनाक चुनौतियों से निपटने में मदद करते हैं। इस अभ्यास से प्राप्त अनुभव भविष्य के संयुक्त अभियानों के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।
IN–SLN DIVEX 2026 ने यह भी दिखाया कि तकनीकी उन्नयन और प्रशिक्षण के माध्यम से समुद्री साझेदारी को कैसे नए मुकाम पर पहुंचाया जा सकता है। दोनों नौसेनाओं ने साझा समुद्री सुरक्षा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सहयोग मजबूत करने का संकल्प लिया है।
इस पहल से भारत और श्रीलंका के समुद्री संबंध न केवल मजबूती पाएंगे, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।
